The blog consists my thoughts, bhajans, vyangs, devoted ghazals, my attainments from life and overall a logical view with traditions and all other aspects of life i.e. culture, emotionals, relationship, faith and devotions etc.
मंगलवार, 12 जनवरी 2010
कल का सच
काटा है खुद उस उपवन को, जिसने हमको पाला है .
कटते वृक्षों का रुदन शब्द हमने न सुना, पर था तो वो ,
विस्तीर्ण गगन सा फैला वन, काटा हमने कल था वो जो .
कल -कल करतीं बहती नदियाँ, हमने ही प्रदूषित कर डालीं ,
उन्मुक्त पवन का अल्हड़पन, कर दिया प्रदूषित था वो जो .
अपने ही खुनी खंज़र से, इस प्रकृति पे हमने वार किये ,
क्रूरतम प्रहारों पर उसने , माँ बनकर अपने ओठ सिये .
रिसते घावों की व्याकुलता , सूनामी से वह व्यक्त करे ,
नव-सृजन को वह भी आतुर है, मानवता से अभिव्यक्त करे .
हम मात्र द्रवित ना हो जाएँ , कष्टों से सहोदर के अपने ,
उस गर्भ का दर्द भी पहचाने , जो पूर्ण करे सबके सपने .
कभी भुज तो कभी सुनामी है , इस धरा की पीड़ा की भाषा ,
नवरचना का संकेत है ऐ, नव-सृजन की आतुर अभिलाषा .
वर्ना वह दिन अब दूर नहीं जब प्रलय से हम मिट जायेंगे ,
हम हों सचेत बस कम्पन से जब हिले धरा तोला-माशा .
गोपालजी .......
शनिवार, 15 अगस्त 2009
जिंदगी
शुक्रवार, 14 अगस्त 2009
सरहद, मेरी ख्वाइश
दिल से मिटा के नफरतें छा जायें दिलों पर ,
किस मुल्क के हैं हम, हमें ये होश ही न हो
फौंजों के बच न पायें निशां इस ज़मीन पर ,
बारूद को भी भेदने को शख्स ना मिले ,
तोपों मिसाइलों का कहीं अक्स ना मिले ,
परवरदिगार मेरे नबी इतना रहम कर
इंसानों में ढूंढे से कहीं रश्क ना मिले ,
नक्शे बने, फ़िर सरहदें, फ़िर जीतने की चाह ,
शस्त्रों के अट्टहास ने, रौंदी दिलों की आह,
बेवाओं, अनाथों के, अश्कों की नींव पर
बनते हैं देश , सरहदें और उनके शहंशाह ,
मज़हब की सरहदें तो, ज़मीं से हैं खतरनाक ,
इंसा बना हैवान , हुए अमन-ओ-चमन खाक ,
मज़हब के जुनूं में, हमें ऐ होश ही नहीं
हमने किया उस एक ही मालिक का जिगर चाक ,
हो एक पिता, एक विश्व, एक सरज़मीं ,
फ़िर हो न कभी, किसी घर में युध्ध की गमीं ,
फ़िर दर्द और ग़म का कहीं होगा ना निशां
गर होगा , तो छलकेगी हर एक आंख में नमीं ,
ज़र्रा हर एक तेरा है , फ़िर क्यों नुमाइश है ,
ताक़त तेरी है , हममें नूरा-आज़माइश है ,
मज़हब से , देश , सरहद से बढ़तीं हैं नफरतें
दिल से मिला दे दिल , या रब बस यही ख्वाइश है ,
दिल से मिला दे दिल , या रब बस यही ख्वाइश है ,
शनिवार, 8 अगस्त 2009
पिंडदान
पिंडदान
पंडित की विद्वता पर
कोई शक करे और प्रशन पूछे
किसी की क्या है मजाल,
डर लगता है सबको
उस अनहोनी का
कि कहीं और न बिगड़ जाए
बिगडे वक़्त कि चाल,
चाहे ख़ुद अपने कर्मों से पाले हों
जिंदगी के सारे बवाल,
क्योंकि कोई पिता
बच्चों कि जिंदगी मैं
नहीं घोलता ज़हर
और नाही पालता कोई जंजाल,
पर पिंडदान और पूर्वजों को तर्पण के वक़्त
दरिया के किनारे
एक मसखरे यजमान ने
पण्डे से दाग दिया एक सवाल,
और पूँछ ही लिया
पंडित जी के स्वर्गवासी पितरों का हाल,
मेरे पितरों का उद्धार करने वाले श्रीमन
उस लोक मैं क्या है आपके पितरों का हाल,
पोथी - पत्रा से डरकर, जीकर या मरकर ,
रुपया दो रूपया, अन्न-जल, दाना - पानी
अपने पितरों को हम तो ऊपर पहुंचा देते ,
आप भी अपने पितरों को
ऐसा ही कुछ करते हैं
या उन्हें यूँ ही टरका देते हैं,
पिंडदान मैं चढा माल
बटोरता हुआ पंडा मुस्कराया
बोला हमें पुश्तों से
यजमानों का ही सहारा है,
इस लोक मैं हमें आपसे
उस लोक मैं हमारे बाप को
आपके पितरों से गुज़ारा है
ऊपर माल भेजने का जो चमत्कार
आप यहाँ हमसे करा रहे हैं,
उस लोक मैं हमारे बाप
आपके पितरों को
कुछ ऐसे ही चरा रहे हैं,
हमें एक तरफ़ लुटा हुआ
निर्विकार यजमान
दूसरी तरफ़ दरिया मैं उतराता
गिध्धों द्वारा नोचा जाता
निश्चेष्ट शव तो नज़र आ रहा था,
पर शव और यजमान की चेतना मैं
अन्तर क्या है
मैं यह नहीं समझ पा रहा था,
"गोपाल जी"
शुक्रवार, 7 अगस्त 2009
बुधवार, 5 अगस्त 2009
Swayamvar
Geedar ki zab maut aati hai to wo shahar ki or aata hai,
Aur Sachchai hai ki,
Zab beti ki kismat phodani ho to baap uska swyamvar rachaata hai,
Mere sangyaan main,
Do bade etihasik swyamvaron ki misaal hai,
Zinko rachaane ka
Dono swargwasi baapon ko malaal hai,
Pahli swyamvar parinity Sita,
Jo daamptya jeevan ka zara bhi sukh nahi paayee,
Doosri Dropdi, jisne bhari sabha main apni durgati karaayee,
Tathaa, Vyaas jaise marmagya aur dharmgyaani
jo maanvataa ke hit main bahut kuch anya likh sakte the
se, Mahabharat jaise,
Bhaiyon ke yuddha se varnit granth ki rachanaa karaayee,
Swyamvar main varit patiyon ki kismat bhi
Bramhaa nahi koyee aur likhtaa hai,
Aisaa pati hota to hai raajaa
Par Sudaamaa se baddtar dikhtaa hai,
Raajpaat chhoot jaataa hai,
Sagaa rishtedaar maal loot jaataa hai,
Darbadr thokren khaate hai
Ghaas Phoos ke bistaron par sote hai,
Raat din varit patni ko haarne yaa khone ke gam main rote hai,
Aajkal phir Swyamvaron kaa chalan panap rahaa hai
Do swyamvar hi kaphee bhaaree pare the,
Zinhone laraayee maarkaat ke
zabardast aur dardnaak granth gadhe the,
Yaa Khuda, Tu mauj lene ke liye roz chamatkaar karta hai
Seriously koyee aisaa chakkar chalaa,
ki ab, Swyamvar se vivaahit jode kee
Tal jaaye har balaa,
"Gopalji"
मंगलवार, 4 अगस्त 2009
स्वयंवर
कहावत है कि,
जब गीदड़ की मौत आती है तो वो शहर की ओर आता है,
और सच्चाई है कि,
जब लड़की की किस्मत फोडनी हो तो बाप उसका स्वयम्बर रचाता है,
मेरे संज्ञान में
दो बड़े एतिहासिक स्वयम्बरों की मिसाल है,
जिनको रचाने का
दोनों स्वर्गवासी बापों को आज तक मलाल है ,
पहली स्वयम्बर परिणिती सीता
जो दाम्पत्य जीवन का ज़रा भी सुख नही पाई,
दूसरी द्रोपदी, जिसने भरी सभा में अपनी दुर्गति कराई,
तथा व्यास जैसे मर्मज्ञ और धर्मज्ञानी,
जो मानवता के हित में बहुत कुछ अन्य लिख सकते थे,
से, महाभारत जैसे,
भाइयों के युद्ध से वर्णित ग्रन्थ की रचना कराइ,
स्वयंवर में वरित पतियों की किस्मत भी ब्रम्हा नही कोई और लिखता है,
ऐसा पति होता तो है राजा , पर सुदामा से भी बददतर दिखता है,
राजपाट छूट जाता है,
सगा रिश्तेदार माल लूट जाता है,
दरबदर ठोकरें खाते हैं, घासफूस के बिस्तरों पर सोते हैं ,
रातदिन वरित पत्नी को हारने या खोने के गम में रोते हैं,
आजकल फिर स्वयंवरों का चलन पनप रहा है
दो स्वयंवर ही काफी भारी पड़े थे,
जिन्होंने लडाई मारकाट के
ज़बदस्त और दर्दनाक ग्रन्थ गढे थे,
या खुदा, तू मौज लेने के लिए रोज़ चमत्कार करता है
सीरियसली कोई ऐसा चक्कर चला,
कि अब, स्वयंवर से वरित विवाहित जोड़े की
टल जाए हर बला ,